पूर्णायु आयुर्वेद चिकित्सालय एवम् अनुसंधान विद्यापीठ

एक अनूठा 54वां वर्षायोग , मध्यप्रदेश के ह्रदयस्थली संस्कारधानी जबलपुर में 17 वर्षों के लंबे अंतराल के पश्चात कुंडलपुर के पूज्य छोटे बाबा आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज का ऐतिहासिक पावन चातुर्मास पूर्णायु आयुर्वेद चिकत्सालय,दयोदय तीर्थ तिलवारा घाट मैं संपन्न होने जा रहा है। इस पावन वर्षायोग में होने वाले चातुर्मासिक कलश स्थापन की द्रव्य राशि का सदुपयोग आचार्य भगवंत के आशिर्वाद से संचालित पूर्णायु आयुर्वेद चिकित्सालय एवं अनुसंधान विद्यापीठ में, शिक्षा और चिकित्सा एवं अहिंसक औषधि निर्माण के क्षेत्र में किया जायेगा मध्य एवं उत्तर भारत का प्रथम 800 विस्तारीय सर्वसुविधायुक्त पाषाण से निर्मित आयुर्वेदिक चिकित्सालय ,जिसमें केरल पद्धाति से पंचकर्म एवं प्राकृतिक चिकित्सा का लाभ लेकर लाखों लोग स्वस्थ होंगे, इस पावन पुनीत वर्षायोग में आप सपरिवार पधारकर एवं अपनी द्रव्य राशि का सदुपयोग कर पुण्यार्जन करें।। कलश बुकिंग करने के लिए Kalash Booking पे क्लिक करें अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें- 9575336699 शीघ्रता करें, .....अंतिम क्षण शेष........

पूर्णायु आयुर्वेद चिकित्सालय एवम् अनुसंधान विद्यापीठ

पूर्णायु प्रकल्प प्रकल्पप्रकल्प

चिकित्सालय

पूर्णायु आयुर्वेद चिकित्सालय एवम् अनुसंधान विद्यापीठ

औषधि

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महाविद्यालय

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पूर्णायु आयुर्वेद चिकित्सालय एवम् अनुसंधान विद्यापीठ

पूर्णायु के उद्देश्यः उद्देश्यःउद्देश्यः

विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा

पूर्णायु संस्थान में विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी सर्वश्रेष्ठ चिकित्सकों, शिक्षाविदों और सामाजिक रूप से जागरुक व्यक्तियों को विकसित करना।

उत्कृष्ट केन्द्र बनाना

संस्था को आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा और अभ्यास के क्षेत्र में उत्कृष्ट केन्द्र बनाना, साथ ही सभी को व्यवस्थित, पूर्ण और समग्र उत्तम स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करना।

आयुर्वेद के सिद्धांत

दुनिया भर में उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि को विस्तारित करने के लिए आयुर्वेद के प्रामाणिक सिद्धान्तों का पालन करना।

प्राचीन आयुर्वेदिक सभ्यता

प्राचीन आयुर्वेद सभ्यता के विलुप्त चिकित्सा पद्धतियों का अन्वेषण करना।

पारम्परिक चिकित्सा पद्धति

आयुर्वेद में वर्णित विभिन्न पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के ज्ञान का पता लगाना और उस पर शोध करना।

पाठ्यक्रम के अनुरूप समीक्षा

वर्तमान में कार्यरत् चिकित्सा कार्यक्रमों को पाठ्यक्रम के अनुरूप समीक्षा और पुनः डिजाईन कर एकीकृत पद्धति के माध्यम से समाज की मांग को ध्यान में रखते हुए कैरियर उन्मुख और उत्तरदायी बनाना।

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